Silhouette Soliloquies Rotating Header Image

divine

मेरे निशाँ…

mere Nishan, tu khan

मैं तो नहीं हूँ इंसानों में
बिकता हूँ मैं तो इन दुकानों में

दुनिया बनाई मैंने हाथों से
मिट्टी से नहीं, जज़्बातों से
फिर रहा हूँ ढूँढता

मेरे निशाँ है कहाँ?
मेरे निशाँ है कहाँ?

तेरा ही साया बनके तेरे साथ चला मैं
जब धूप आई तेरे सर पे तो छाँव बना मैं
तेरा ही साया बनके तेरे साथ चला मैं
जब धूप आई तेरे सर पे तो छाँव बना मैं
राहों में तेरी रहा मैं हमसफ़र की तरह

उलझा है फिर भी तू जालों में
ढूँढे सवालों को जवाबों में
खोया हुआ है तू कहाँ? (तू कहाँ)

मुझसे बने हैं ये पंछी, ये बहता पानी
लेके ज़मीं से आसमाँ तक मेरी ही कहानी
मुझसे बने हैं ये पंछी, ये बहता पानी
लेके ज़मीं से आसमाँ तक मेरी ही कहानी
तू भी है मुझसे बना, बाँटे मुझे क्यूँ यहाँ?

मेरी बनाई तक़दीरें हैं (तक़दीरें हैं)
साँसों भरी ये तस्वीरें है
फिर भी हैं क्यूँ बेज़ुबाँ? (बेज़ुबाँ) मेरे निशाँ… — Lyrics by Kumaar

Share this Post[?]